शुक्र छटे भाव में

षष्ठम (शत्रु व रोग भाव)- इस भाव में शुक्र के शुभ फल अधिक मिलते हैं, मतान्तर से शुक्र यहाँ निष्फल होता है लेकिन अधिक मत शुक्र के शुभ फल देने के हैं। शुक्र के निष्फल होने के मत में जातक शारीरिक रूप से सुखहीन, दुराचारी, अधिक मित्र वाला, मूत्र रोग से ग्रसित, विपरीत लिंग में […]

शुक्र पाचवे भाव में

पंचम (संतान व विद्या भाव)- इस भाव में शुक्र जातक को सुखी, सद्गुणी परन्तु भोग-विलास में लीन, विद्वान, ईश्वरवादी तथा सभी के साथ न्याय करने वाला बनाता है। ऐसा जातक काव्य व कलाप्रवृत्ति का, सट्टे-लाटरी के साथ प्रणय व्यापार में लाभ लेने वाला होता है। उसके बहु कन्या सन्तति होती है जो अत्यधिक सुन्दर व […]

शुक्र चौथे भाव में

चतुर्थ (सुख भाव)- इस भाव के शुक्र के प्रभाव से जातक दीर्घायु, भाग्यवान, परोपकारी, विलासी प्रवृत्ति, ईश्वर में विश्वास, सभी से अच्छा व्यवहार करने वाला व पुत्रवान होता है। ऐसा जतक भवन-वाहन का पूर्ण सुख भोगता है। वह भूमि के साथ माता से भी लाभ प्राप्त करता है। अपने निवास व कार्यालय को भी भौतिक […]

शुक्र तीसरे भाव में

तृतीय (पराक्रम भाव)- इस भाव में शुक्र के प्रभाव से जातक सुखी, धनवान परन्तु उच्चस्तरीय कंजूस, विद्वान, चित्रकार, पराक्रम से भरा हुआ, भाग्यशाली तथा पर्यटन प्रेमी होता है। ऐसे व्यक्ति के कई भाई-बहिन होते हैं। लेखन कार्यों में यश प्राप्त करता है। ऐसे जातक के किसी भी यात्रा में किसी से प्रणय सम्बन्ध का योग […]

शुक्र दूसरे भाव में

द्वितीय (धन भाव)- इस भाव में शुक्र जातक को धनवान, मीठा अधिक पसन्द करने वाला, समाज में यश व सम्मान पाने वाला, सुखी, रत्नों से आर्थिक लाभ लेने वाला, कुटुम्ब युक्त, साहसी, कविता करने वाला तथा अत्यधिक मधुर बोलने वाला, सुन्दर नेत्र युक्त व कर्त्तव्य परायण बनाता है। ऐसे जातक का जीवनसाथी प्रत्येक क्षेत्र में […]

शुक्र पहले भाव में

प्रथम भाव- शुक्र एक नैसर्गिक शुभ ग्रह है। पत्रिका में केवल इनकी शुभ स्थिति ही जातक के जीवन को संवार देती है। इस भाव में शुक्र जातक को दीर्घायु, सुन्दर, ऐश्वर्यशाली, मधुर बोलने वाला, भोग-विलास में लीन, कामी प्रवृत्ति के साथ काम कला में प्रवीण व राज्य से लाभ लेने वाला होता है। ऐसा जातक […]