pitra dosh hindi

Click here to read in english पित्र दोष क्या है ? वैदिक ग्रंथो के आधार पर पूर्वजो के द्वारा किये गए कर्मो का फल आने वाली पीड़ियों को तब तक झेलना पड़ता है जब तक की आनी वाली पीड़िया पूर्वजो द्वारा किये गए बुरी कर्मों का निवारण न करवाए ! कई विद्वानों का मनना है की हमारे पूर्वजो का यदि पिंड दान और श्राद न किया जाए तो हमारे पूर्वज हमें परेशानं करते है और इसे ही पित्र दोष कहते है ! परन्तु मेरा मानना है की हमारे पूर्वज कभी हमें परेशान नहीं करते, जिस प्रकार पिता का लिया क़र्ज़ या पिता की कुरीति समाज में संतान को भोगनी पड़ती है उसी प्रकार यदि पिता अपने जीवन में बुरे कर्मों को कर के चला जाता है तो उसकी आने वाली पीड़ियों को उसके कर्मो के फल भोगने पड़ते है ! इसी को पित्र दोष कहते है ! पित्र दोष के हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ते है ? दोस्तों किसी भी जातक की कुडली में पित्र दोष का सबसे बुरा प्रभाव उस जातक की संतान पर आता है ! जैसे यदि किसी जातक की कुंडली में पित्र दोष है तो उस जातक को संतान की कमी या संतान सम्बन्धी परेशानियों से जूझना पड़ता है ! उस जातक की या तो संतान नहीं होती, यदि हो जाए तो एक से अधिक नहीं होती वो भी हमेशा स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करती है ! और जीवन में कभी माता पिता को सुख नहीं देती ! संतान द्वारा किये गए बुरे कामों के कारण हमेशा माता पिता को परेशान होना पड़ता है ! इसके अलावा पित्र दोष के कारण जातक हमेशा आर्थिक परेशानियों से जूझता रहता है ! कड़ी मेहनत के बावजूद आमदनी कम होती है और बहुत मुश्किलों से ही अपना घर खर्च चला पाता है ! पित्र दोष के कारण कभी भी परिवार में बुजुर्गो का सम्मान नहीं करता ! हमेशा बड़ो का अनादर करता है ! और यही आदते उसकी संतान में भी होती है ! इन्ही सभी कारणों की वजह से जातक के सम्बन्ध पत्नी से भी अच्छे नहीं होते और घर में हमेशा कलेश बना रहता है ! यदि जातक मांगलिक दोष से भी पीड़ित है तो निश्चित ही पत्नी से संबन विच्छेद हो जाता है ! किस प्रकार जाने की कुंडली में पित्र दोष है या नहीं ? दोस्तों सबसे पहले तो देखे की उपरोक्त लक्षण आपके जीवन में है या नहीं ! और यदि है तो फिर अपनी कुंडली का भी निरिक्षण करे या किसी अनुभवि ज्योतिष से निरिक्षण करवाए ! पित्र दोष की जाच के लिए कुंडली में सबसे पहले सूर्य की स्थिति को देखे ! दोस्तों सूर्य का सम्बन्ध हमारे मान सम्मान, पिता और बुजुर्गो से होता है ! यदि कुडली में सूर्य पीड़ित होगा तो पित्र दोष अवश्य होगा ! गुरु को भी पिता सामान माना गया है क्योकि पिता संतान को जन्म देता है और पालता है परन्तु गुरु संतान को जीवन जीने के काबिल बनता है ! इसीलिए गुरु की स्थिति को भी जाचना आवश्यक है ! क्योकि यदि गुरु पीड़ित होगा तो जातक का झुकाव गलत कार्यों की तरफ अधिक होगा ! इसके आलावा कुंडली में यदि नवम भाव, पंचम भाव और सूर्य तथा गुरु, राहू या शनि के द्वारा पीड़ित है, चाहे उनकी युक्ति हो या दृष्टि, पित्र दोष अवश्य होगा ! पित्र दोष का निवारण कैसे करे ? सबसे पहले अपने जीवन में अच्छे कर्म करे ! क्योकि आपके किये गए अच्छे कर्मो से ही आपके पूर्वजों के किये गए कर्मो की काट होगी और उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होगी ! आपकी संतान भी आपके कर्मो से प्रेरित होकर अच्छी जीवन शैली को अपनाएगी और आपका सम्मान करेगी ! और आपकी आने वाली पीढ़ियों की कुंडली में पित्र दोष नहीं बनेगा ! इसके आलावा सूर्य और गुरु को बलवान बनाये और राहू और शनि की शांति के उपाय करे ! बड़े बुजुर्गों की सेवा करे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करे ! ज्योतिषीय उपायों के लिए किसी अनुभवी ज्योतिष से अवश्य संपर्क करे ! लेखक ज्योतिष सुनील कुमार Support my work by donating on Patreon. http://patreon.com/astrologersunilkumar/ To book your telephonic astrology consultation with Astrologer Sunil Kumar click the link below https://astrologyhoroscope.co.in/book-consultation/ To buy certified gemstones click the link below https://astrologyhoroscope.co.in/buy-gemstones/ Astrologer Sunil Kumar Whatsapp + 91 9915576799 Email – astrologerkumar13@gmail.com https://astrologyhoroscope.co.in https://www.facebook.com/astrologersunilkumar/