राहु नौवे भाव में

नवम (धर्म व भाग्य भाव)- कुंडली के नवम भाव में राहू यदि अधिक अशुभ हो तो बचपन में ही पिता का सुख छीन लेता है। जातक मेहनती होता है परन्तु उसे उसके परिश्रम का पर्याप्त फल प्राप्त नहीं होता। वह अधिकतर जन्म स्थान से दूर अथवा विदेश में प्रवास करता है। भाग्यहीन, दुष्टबुद्धि परन्तु धार्मिक […]

राहु पाचवे भाव में

पंचम (संतान व विद्या भाव)- कुंडली के पांचवे भाव में राहू होने से जातक बुद्धिमान नहीं होता परन्तु किसी भी कारण से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सफल रहता है।उसके पास धन की कमी हमेशा रहती है और यदि पैतृक धन प्राप्त हो जाये तो उसका नाश कर देता है।पांचवा भाव संतान भाव होने के […]

राहु बारहवे भाव में

द्वादश (व्यय भाव)- कुंडली के बारहवे भाव में राहू के अशुभ फल अधिक मिलते हैं। जातक अत्यधिक व्यर्थ खर्च करने वाला, सदैव चिन्ता में रहने वाला तथा काम-वासना से पीड़ित रहता है। ऐसा व्यक्ति अधिकतर नीच कर्मों में लीन रहता है। कुंडली का बारहवा स्थान शैया सुख तथा नेत्र स्थान होता है, राहु की स्थिति […]

राहु ग्यारहवे भाव में

एकादश (आय भाव)- कुंडली के ग्यारहवे भाव में राहू अधिकतर शुभ फल प्रदान करता है। जातक की संतान कम होती है। पेट सम्बन्धी समस्या रहती है, ऐसा जातक की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है। अधिकतर ऐसे जातक को किसी अनैतिक कार्यों से धन प्राप्त होता है। संतान समस्याओं से हमेशा परेशान रहता है। ग्यारहवे भाव […]

राहु दसवे भाव में

दशम (पिता व कर्म भाव)- कुंडली के दसवे भाव में राहू जातक आलसीबनता है, जातक बेहद बातूनी होता है और अपने कार्य को कभी भी नियमित तरीके से नहीं करता। जातक के संतान के साथ मतभेद रहते है। यदि जातक राजनीती में हो तो एक कठोर शासक के रूप में उभरता है, बहुत प्रतिभाशाली एवं […]

राहु आठवे भाव में

अष्टम (मारक भाव)- राहु कुंडली के आठवे भाव में अशुभ फल अधिक देता है। ऐसा जातक अत्यधिक कामी होता है। इस कारण जातक को गुप्त रोग होने की सम्भावना रहती है।जिन जातक का राहु आठवे भाव में हो उन्हें वेश्या से सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए अन्यथा गुप्त रोग अवश्य होता है।राहु आठवे भाव में जातक […]