शुक्र बारहवे भाव में

द्वादश (व्यय भाव)- इस भाव में शुक्र के अन्य ग्रहों की अपेक्षा अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस भाव में भी शुक्र के शुभ फल का मुख्य कारण यह होता है कि जैसा ज्योतिष का नियम है कि जो भी ग्रह व्यय भाव अर्थात् इस भाव में बैठेगा तो वह अपने कारक फल का […]

शुक्र ग्यारहवे भाव में

एकादश (आय भाव)- इस भाव में शुक्र शुभ फल अधिक देता है जो आर्थिक क्षेत्र में अधिक शुभ हो जाते हैं। जातक भाग्यवान, स्थिर लक्ष्मी का स्वामी, रत्नों व सफेद वस्तुओं से लाभ प्राप्त करने वाला, विलासी प्रवृत्ति, वाहनसुखी, गुणवान, ज्ञानवान, संगीत व फिल्मों का शौकीन व पुत्र सन्तति से युक्त होता है। ऐसे जातक […]

शुक्र दसवे भाव में

दशम (पिता व कर्म भाव)- इस भाव में शुक्र जातक को विलासी प्रवृत्ति का, राज्यमान, सुखी, ऐश्वर्यशाली, सभी के साथ न्याय करने वाला तथा गीत-संगीत व ज्योतिष में रुचि रखने वाला होता है। इस भाव का शुक्र जातक को राज्य में सम्मान अथवा कोइ्र पद के साथ पुरस्कार भी दिलवाता है। जातक विपरीत लिंग से […]

शुक्र नौवे भाव में – Astrologer Sunil kumar

नवम (धर्म व भाग् भाव)- इस भाव में शुक्र के प्रभाव से जातक दयालु प्रवृत्ति का, तपस्वी, ईश्वर पर विश्वास, गृह सुखी, राज्य में सम्मान प्राप्त, गुणवान तथा कई तीर्थयात्रा तथा लम्बी विदेश यात्रा करने वाला होता है। विदेशों में कलात्मक अथवा साहित्यिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।ऐसे जातक का विवाह परदेसवासी से होता […]

शुक्र आठवे भाव में

यदि शुक्र अष्टम भाव में स्थित हो तो जातक विदेश में निवास करता है, अष्टम भाव में शुक्र यदि अशुभ प्रभाव में हो तो जातक गुप्त रोगी होता है और उसके कई अवैध सम्बन्ध भी हो सकते है ! जातक माता को कष्ट अवश्य देता है अधिक काम वासना होने के कारण अपने से बड़ी […]

शुक्र सातवे भाव में

सप्तम (जीवनसाथी भाव)- यह भाव शुक्र का कारक भाव है परन्तु मेरे शोध के अनुसार इस भाव में शुक्र शुभ फल अधिक नहीं देता है। ऐसा जातक जीवनसाथी से सुख प्राप्त करने के साथ धनवान, उदार प्रवृत्ति का, समाज में लोकप्रिय (मेरे अनुभव में जातक का नाम तो अवश्य होता है परन्तु बुरे रूप में […]