बारहवाँ भाव हानि, व्यय, विदेश, एकांत, मोक्ष, आध्यात्मिकता, अस्पताल, आश्रम, त्याग और अवचेतन मन का क्षेत्र माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तब यह व्यक्ति को जीवन की गहराइयों, आध्यात्मिक मार्ग और भीतर की दुनिया से जोड़ता है। सूर्य यहाँ रहस्यमयी, अंतर्मुखी और कभी-कभी खर्च बढ़ाने वाले प्रभाव भी देता है।


स्वभाव और व्यक्तित्व

  • ऐसे व्यक्ति अंतर्मुखी, संवेदनशील, कल्पनाशील और गहरे विचारों वाले होते हैं।

  • कई बार यह लोग अपनी भावनाएँ खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते और अपने भीतर एक अलग दुनिया बनाकर रखते हैं।

  • अकेले रहना पसंद करना, शांत वातावरण की चाह और गुप्त रूप से काम करने की आदत देखी जाती है।

  • आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक झुकाव बहुत जल्दी विकसित हो जाता है।


विदेश योग

  • सूर्य बारहवें भाव में होने से विदेश यात्रा, विदेश में काम या विदेश से लाभ होने की संभावना प्रबल होती है।

  • कई बार व्यक्ति लंबे समय तक विदेश में रह सकता है।

  • विदेशी कंपनियों, मल्टीनेशनल संगठनों या अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में काम करना भी संभव है।


व्यय और आर्थिक स्थिति

  • खर्च अधिक रहते हैं—कभी आवश्यकता अनुसार, तो कभी अनियंत्रित रूप से।

  • आँख, स्वास्थ्य, यात्रा या आध्यात्मिक गतिविधियों पर खर्च बढ़ सकता है।

  • यदि सूर्य मजबूत हो तो विदेश से आय, बड़े पद और सम्मान के साथ आर्थिक संतुलन भी बना रहता है।

  • सूर्य पीड़ित हो तो धन हानि, कानूनी खर्च या छुपे हुए खर्च बढ़ते हैं।


करियर और कामकाज

  • व्यक्ति अस्पताल, आश्रम, NGO, विदेश सेवा, हॉस्पिटैलिटी, शोध, आध्यात्मिक सेवा, रक्षा विभाग, सुरक्षा सेवा या गोपनीय विभाग में काम कर सकता है।

  • सूर्य की यह स्थिति शोधकर्ताओं, गुप्तचर विभाग, मनोविज्ञान, ध्यान-योग, विदेश मंत्रालय और आध्यात्मिक शिक्षकों के लिए बहुत अनुकूल रहती है।

  • अकेले काम करने या पर्दे के पीछे काम करने में विशेष सफलता मिलती है।


पिता से संबंध

  • पिता के जीवन में कठिनाइयाँ हो सकती हैं या उनसे दूरी के योग बनते हैं।

  • कई बार पिता विदेश में रहते हैं या उनका जीवन कठिनाइयों से भरा होता है।

  • यदि सूर्य शुभ हो तो पिता से दूर रहकर भी उनका आशीर्वाद और सहयोग मिलता रहता है।


आध्यात्मिकता और अंतर्ज्ञान

  • यह सूर्य व्यक्ति को भीतर की यात्रा करने और अपनी आत्मिक शक्ति समझने की प्रेरणा देता है।

  • ध्यान, योग, साधना, ब्रह्मचर्य या आध्यात्मिक मार्ग में विशेष रुचि होती है।

  • व्यक्ति को भविष्य की आहट महसूस करने या लोगों को गहराई से समझने की क्षमता मिलती है।


स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • आँखों की समस्या, नींद में कमी, तनाव, ब्लड प्रेशर, रोगों में खर्च जैसे मुद्दे हो सकते हैं।

  • मानसिक थकान या एकांत में रहने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिसे संतुलित करना आवश्यक है।


नकारात्मक प्रभाव (यदि सूर्य कमजोर या पाप प्रभाव में हो)

  • अधिक खर्च और हानि

  • पिता से दूरी

  • आत्मविश्वास की कमी

  • नींद की समस्या

  • गुप्त शत्रु या कानूनी परेशानी

  • विदेश में संघर्ष

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