सूर्य बारहवें भाव में
बारहवाँ भाव हानि, व्यय, विदेश, एकांत, मोक्ष, आध्यात्मिकता, अस्पताल, आश्रम, त्याग और अवचेतन मन का क्षेत्र माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तब यह व्यक्ति
बारहवाँ भाव हानि, व्यय, विदेश, एकांत, मोक्ष, आध्यात्मिकता, अस्पताल, आश्रम, त्याग और अवचेतन मन का क्षेत्र माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तब यह व्यक्ति
कुंडली का ग्यारहवाँ भाव लाभ, आय, इच्छाओं की पूर्ति, सामाजिक नेटवर्क, मित्र, बड़े लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं का घर माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो जाता है,
दसवाँ भाव कर्म, करियर, प्रतिष्ठा, सामाजिक पहचान, प्रसिद्धि और जिम्मेदारियों का घर माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो, तो यह ज्योतिष में सबसे शक्तिशाली और शुभ
कुंडली का नवम भाव भाग्य, धर्म, शिक्षा, गुरु, यात्रा, सिद्धांत और जीवन दर्शन का घर माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो, तो व्यक्ति के जीवन में
कुंडली में आठवां भाव सबसे रहस्यमयी, गूढ़ और परिवर्तनकारी माना जाता है। यहाँ उपस्थित ग्रह जातक के जीवन में गहरी ऊर्जाएँ, अप्रत्याशित घटनाएँ, मानसिक व आध्यात्मिक परिवर्तन लेकर आते हैं।
जन्मकुंडली का सातवाँ भाव विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी, व्यापारिक संबंध, सार्वजनिक छवि और सामाजिक व्यवहार का प्रतिनिधि है। यह भाव संबंधों की परिपक्वता, सहयोग और संतुलन को दर्शाता है। जब सूर्य
जन्मकुंडली का छठा भाव ऋण, रोग, शत्रु, प्रतियोगिता, संघर्ष, सेवा, नौकरी, अनुशासन, कार्यस्थल और मानसिक दृढ़ता का प्रतिनिधि है। सूर्य जब इस भाव में आता है, तो जातक के जीवन
जन्मकुंडली का पाँचवाँ भाव बुद्धि, संतान, रचनात्मकता, प्रेम संबंध, शिक्षा, भाग्य, प्राचीन ज्ञान और पूर्व जन्म के कर्मों का प्रतिनिधि होता है। इस भाव में सूर्य का बैठना व्यक्ति के
जन्मकुंडली का चौथा भाव सुख, माता, घर-परिवार, संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति, जमीन-जायदाद और जीवन की नींव का प्रतिनिधित्व करता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तो व्यक्ति
जन्मकुंडली में तीसरा भाव पराक्रम, साहस, आत्मविश्वास, भाई–बहन, संचार कौशल, मेहनत, यात्रा और कौशलों का प्रतिनिधि माना जाता है। सूर्य जब इस भाव में स्थित होता है, तो व्यक्ति के