जन्मकुंडली का छठा भाव ऋण, रोग, शत्रु, प्रतियोगिता, संघर्ष, सेवा, नौकरी, अनुशासन, कार्यस्थल और मानसिक दृढ़ता का प्रतिनिधि है। सूर्य जब इस भाव में आता है, तो जातक के जीवन में संघर्ष, चुनौतियाँ और आत्मशक्ति दोनों को बढ़ाता है। यह स्थिति व्यक्ति को मजबूत बनाती है, परंतु कुछ क्षेत्रों में कठोर अनुभव भी दे सकती है।
कार्यस्थल और नौकरी
छठे भाव में सूर्य वाला व्यक्ति मेहनती, अनुशासित और जिम्मेदार स्वभाव का होता है।
नौकरी या सर्विस सेक्टर में इसे सफलता जरूर मिलती है क्योंकि सूर्य यहाँ संघर्षों को जीतने की शक्ति देता है।
ऐसे जातक
सरकारी नौकरी
प्रशासनिक पद
पुलिस, सेना, सुरक्षा सेवाएँ
चिकित्सा
कानून
न्यायालय
या किसी भी सेवामूलक क्षेत्र
में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
उनमें प्रतिस्पर्धा जीतने की क्षमता होती है, और धीरे-धीरे उच्च पद तक पहुंचने का योग बनता है।
शत्रु और विरोधी
छठे भाव का सूर्य शत्रुओं को पराजित करने वाला माना गया है।
ऐसे लोगों को विरोधी तो मिलते हैं, लेकिन अंत में विजय उन्हीं की होती है।
यह सूर्य जातक को मानसिक साहस, हिम्मत और दृढ़ निश्चय देता है।
हालाँकि कभी-कभी अहं या कठोर वाणी के कारण शत्रु खुद पैदा भी हो सकते हैं।
स्वास्थ्य और रोग
सूर्य यहाँ स्वास्थ्य को मिश्रित प्रभाव देता है
सूर्य शुभ हो तो व्यक्ति रोगों से जल्दी उभर जाता है
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
शरीर में ऊर्जा बनी रहती है
लेकिन सूर्य कमजोर हो या पाप प्रभाव में हो, तो
पित्त विकार
पेट की गर्मी
सीने या पेट के रोग
रक्तचाप की समस्या
पेट दर्द या पाचन संबंधी कठिनाई
जैसी समस्याएँ आ सकती हैं।
मानसिक तनाव भी कभी-कभी बढ़ सकता है।
ऋण और वित्तीय पक्ष
छठे भाव में सूर्य की स्थिति ऋण और उधार संबंधी मामलों में सावधानी की सलाह देती है।
शुभ सूर्य धीरे-धीरे ऋण से मुक्ति दिलाता है,
लेकिन अशुभ सूर्य व्यक्ति को बार-बार ऋण लेने या वित्तीय दबाव में डाल सकता है।
सही निर्णय और अनुशासन से वित्तीय सुधार संभव रहता है।
परिवार और संबंध
यह सूर्य व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर बनाता है, लेकिन कभी-कभी व्यवहार कठोर भी कर देता है।
परिवार में पारस्परिक समझ बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।
सूर्य अगर पाप प्रभाव में हो, तो पिता से विचार मतभेद या दूरी हो सकती है, परंतु शुभ स्थिति में पिता का सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है।
स्वभाव और व्यक्तित्व
ऐसे जातक अपने काम में स्पष्ट, ईमानदार और सीधे होते हैं।
इनमें अनुशासन, कर्तव्य और कार्यनिष्ठा की भावना बहुत मजबूत रहती है।
लेकिन कभी-कभी बोलचाल में तेजी, गुस्सा या अधिकार का भाव अधिक दिख सकता है।
ये लोग अपने काम से स्वयं की पहचान बनाते हैं और संघर्षों से शक्ति प्राप्त करते हैं।
प्रतियोगिता और कानूनी मामले
छठे भाव में सूर्य प्रतियोगिताओं, कोर्ट-कचहरी या किसी विवाद में विजय दिलाने वाला योग बनाता है।
ऐसे लोग प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, खासकर जब सूर्य शुभ हो।
आध्यात्मिक और नैतिक पक्ष
यह सूर्य व्यक्ति को आत्मअनुशासन, कर्मयोग और कर्तव्यपरायणता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
ऐसे लोग अपने जीवन के उद्देश्यों को गंभीरता से समझते हैं।
उपाय
यदि सूर्य अशुभ फल दे रहा हो या छठे भाव में संघर्ष बढ़ा रहा हो, तो ये उपाय सहायक हो सकते हैं
सूर्य को प्रतिदिन जल अर्पित करें
तांबे का उपयोग बढ़ाएँ
गुड़, गेहूँ या लाल कपड़े का दान करें
पिता और गुरु का सम्मान करें
अनुशासन और समयपालन जीवन में अपनाएँ
सूर्य मंत्र का जाप करें