वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह है। षष्ठ भाव रोग, ऋण, शत्रु, सेवा, संघर्ष और दैनिक जीवन की जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। जब चंद्रमा षष्ठ भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन लगातार संघर्ष और समाधान की स्थिति में रहता है। ऐसा व्यक्ति जीवन की चुनौतियों से भावनात्मक रूप से जूझता है और समस्याओं को दिल से महसूस करता है। इस स्थिति में व्यक्ति सेवा भाव वाला होता है। वह दूसरों की मदद करने में मानसिक संतोष महसूस करता है और कठिन परिस्थितियों में भी जिम्मेदारी उठाने से पीछे नहीं हटता।…
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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, कल्पनाशक्ति और संवेदनशीलता का प्रतीक ग्रह है। पंचम भाव बुद्धि, रचनात्मकता, प्रेम, संतान, शिक्षा और पूर्व पुण्य से जुड़ा होता है। जब चंद्रमा पंचम भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन रचनात्मक सोच, भावनात्मक बुद्धि और प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति की ओर झुक जाता है। ऐसा व्यक्ति स्वभाव से कल्पनाशील और भावनात्मक रूप से बुद्धिमान होता है। उसकी सोच में गहराई होती है और वह चीजों को केवल तर्क से नहीं बल्कि भावना से भी समझता है। पढ़ाई लिखाई में रुचि तब अधिक होती है जब विषय उसे मानसिक और भावनात्मक रूप से आकर्षित…
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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, माता, स्मृति और आंतरिक शांति का प्रतीक ग्रह है। चतुर्थ भाव सुख, घर, माता, मातृभूमि, संपत्ति और मानसिक संतुलन से जुड़ा होता है। जब चंद्रमा चतुर्थ भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन घर, परिवार और आंतरिक शांति से गहराई से जुड़ा रहता है। ऐसा व्यक्ति भीतर से बहुत संवेदनशील और भावनात्मक होता है। उसे अपने घर, अपनी जड़ों और अपने लोगों से गहरा लगाव होता है। घर का वातावरण यदि शांत और प्रेमपूर्ण हो तो यह व्यक्ति मानसिक रूप से बहुत मजबूत रहता है, लेकिन घर में अशांति होने पर उसका…
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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, संवेदनशीलता और मानसिक प्रवृत्ति का प्रतीक है। तृतीय भाव साहस, पराक्रम, संवाद, लेखन, छोटे भाई बहन, प्रयास और दैनिक मेहनत से जुड़ा होता है। जब चंद्रमा तृतीय भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन लगातार सक्रिय रहता है और वह अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए बेचैन रहता है। ऐसा व्यक्ति बोलने, लिखने और अपनी बात रखने में सहज होता है। उसकी सोच भावनात्मक जरूर होती है लेकिन उसमें रचनात्मकता भी होती है। वह अपनी भावनाओं को शब्दों के माध्यम से बाहर निकालना चाहता है। इसी कारण लेखन, मीडिया,…
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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, संवेदनशीलता, माता और मानसिक स्थिति का प्रतीक माना जाता है। द्वितीय भाव धन, परिवार, वाणी, भोजन और संस्कारों से जुड़ा होता है। जब चंद्रमा द्वितीय भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन सीधे इन विषयों से जुड़ जाता है। ऐसा व्यक्ति अपने परिवार और आर्थिक स्थिति को लेकर बहुत भावनात्मक होता है और इन्हीं बातों से उसकी मानसिक शांति या अशांति तय होती है। इस स्थिति में व्यक्ति की वाणी में भावनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। वह जो भी बोलता है उसमें दिल शामिल होता है। ऐसे लोग मधुर…
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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, संवेदनशीलता, माता और मानसिक स्थिति का प्रतिनिधि ग्रह है। प्रथम भाव को लग्न भाव कहा जाता है और यह व्यक्ति के शरीर, व्यक्तित्व, स्वभाव और जीवन के प्रति उसके दृष्टिकोण को दर्शाता है। जब चंद्रमा प्रथम भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन और व्यक्तित्व एक दूसरे से पूरी तरह जुड़ जाते हैं। ऐसा व्यक्ति जो सोचता है वही उसके चेहरे, व्यवहार और प्रतिक्रिया में साफ दिखाई देता है। इस स्थिति में व्यक्ति स्वभाव से भावुक, कोमल और संवेदनशील होता है। वह दूसरों की भावनाओं को जल्दी समझ लेता है और उनके…
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भगवान श्रीकृष्ण का पृथ्वी पर अवतार केवल धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए हुआ था। जब उनका कार्य पूरा हो गया और द्वारका में यादव कुल के भीतर अराजकता बढ़ने लगी, तब उनका पृथ्वी-लीला समापन की ओर बढ़ा। यह कथा अत्यंत गहरी और शिक्षाप्रद है। नीचे इस घटना का क्रमबद्ध और विस्तृत वर्णन दिया गया है। 1. यादव वंश का पतन प्रारंभ होना महाभारत युद्ध के बाद शांति का समय आया। द्वारका समृद्ध और शक्तिशाली थी। लेकिन उसी समय एक घटना घटी जो यादव कुल के विनाश का कारण बनी। एक दिन ऋषि—नारद, दुर्वासा और विश्वामित्र—द्वारका आए।…
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बारहवाँ भाव हानि, व्यय, विदेश, एकांत, मोक्ष, आध्यात्मिकता, अस्पताल, आश्रम, त्याग और अवचेतन मन का क्षेत्र माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तब यह व्यक्ति को जीवन की गहराइयों, आध्यात्मिक मार्ग और भीतर की दुनिया से जोड़ता है। सूर्य यहाँ रहस्यमयी, अंतर्मुखी और कभी-कभी खर्च बढ़ाने वाले प्रभाव भी देता है। स्वभाव और व्यक्तित्व ऐसे व्यक्ति अंतर्मुखी, संवेदनशील, कल्पनाशील और गहरे विचारों वाले होते हैं। कई बार यह लोग अपनी भावनाएँ खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते और अपने भीतर एक अलग दुनिया बनाकर रखते हैं। अकेले रहना पसंद करना, शांत वातावरण की चाह और गुप्त…
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कुंडली का ग्यारहवाँ भाव लाभ, आय, इच्छाओं की पूर्ति, सामाजिक नेटवर्क, मित्र, बड़े लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं का घर माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो जाता है, तो यह व्यक्ति को आय, प्रतिष्ठा, बड़े लोगों से संबंध और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करता है। यह सूर्य का एक अत्यंत लाभदायक और प्रगतिशील स्थान माना जाता है। स्वभाव और व्यक्तित्व ऐसे जातक बहुत महत्वाकांक्षी, योजनाबद्ध, सामाजिक और आत्मविश्वासी होते हैं। रिश्ते बनाने और नेटवर्क बढ़ाने में माहिर रहते हैं। व्यक्तित्व में नेतृत्व के गुण होते हैं, और लोग इनके विचारों और सुझावों को महत्व देते…
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दसवाँ भाव कर्म, करियर, प्रतिष्ठा, सामाजिक पहचान, प्रसिद्धि और जिम्मेदारियों का घर माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो, तो यह ज्योतिष में सबसे शक्तिशाली और शुभ स्थानों में गिना जाता है। सूर्य यहाँ अपनी पूरी चमक के साथ प्रभाव डालता है और व्यक्ति को कर्म, समाज और मेहनत के क्षेत्र में पहचान दिलाता है। स्वभाव और व्यक्तित्व ऐसे जातक आत्मविश्वासी, कर्तव्यनिष्ठ, मेहनती और नेतृत्व गुणों से भरपूर होते हैं। व्यक्तित्व में एक स्वाभाविक authority दिखाई देती है और लोग इन्हें सम्मान से देखते हैं। निर्णय लेने की क्षमता अच्छी होती है और स्थिति को नियंत्रण में…