कुंडली का नवम भाव भाग्य, धर्म, शिक्षा, गुरु, यात्रा, सिद्धांत और जीवन दर्शन का घर माना जाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो, तो व्यक्ति के जीवन में भाग्य का विशेष हस्तक्षेप, ऊँचे विचार, धार्मिक/आध्यात्मिक झुकाव और पिता व गुरु से मिलने वाले मार्गदर्शन का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। स्वभाव और व्यक्तित्व ऐसे जातक उच्च आदर्शों वाले, नैतिक मूल्यों को मानने वाले और सिद्धांतवादी होते हैं। सत्यप्रिय, आत्मविश्वासी और अपने विचारों पर दृढ़ रहते हैं। इन्हें दूर की सोच, दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि रहती है। जीवन में भाग्य कई बार महत्वपूर्ण मोड़ लाता है और…
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कुंडली में आठवां भाव सबसे रहस्यमयी, गूढ़ और परिवर्तनकारी माना जाता है। यहाँ उपस्थित ग्रह जातक के जीवन में गहरी ऊर्जाएँ, अप्रत्याशित घटनाएँ, मानसिक व आध्यात्मिक परिवर्तन लेकर आते हैं। जब सूर्य इस भाव में स्थित हो, तब आत्मविश्वास, अहं, पिता से जुड़े विषय, जीवन में उतार–चढ़ाव और गोपनीय पहलू बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। सूर्य आठवें भाव में – संपूर्ण प्रभाव सूर्य यहाँ तामसिक और रहस्यमयी वातावरण के बीच अपनी रोशनी बिखेरता है। जातक जीवन के रहस्यों को समझने वाला, शोधप्रिय, धीरे-धीरे सफलता पाने वाला और अपने अंदर एक गहरी शक्ति रखने वाला बनता है। यह स्थिति व्यक्ति को…
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जन्मकुंडली का सातवाँ भाव विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी, व्यापारिक संबंध, सार्वजनिक छवि और सामाजिक व्यवहार का प्रतिनिधि है। यह भाव संबंधों की परिपक्वता, सहयोग और संतुलन को दर्शाता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तो यह रिश्तों में अधिकार, नेतृत्व और आत्मसम्मान का प्रभाव लेकर आता है। सूर्य का तेज यहाँ व्यक्ति को आकर्षक और प्रभावशाली बनाता है, लेकिन रिश्तों में कुछ गर्माहट और अहं भी जोड़ सकता है। विवाह और जीवनसाथी सातवें भाव में सूर्य विवाह को महत्वपूर्ण और जीवन का केंद्र बिंदु बना देता है।जातक को ऐसा जीवनसाथी मिल सकता है जो तेजस्वी, आत्मविश्वासी, प्रभावशाली या…
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जन्मकुंडली का छठा भाव ऋण, रोग, शत्रु, प्रतियोगिता, संघर्ष, सेवा, नौकरी, अनुशासन, कार्यस्थल और मानसिक दृढ़ता का प्रतिनिधि है। सूर्य जब इस भाव में आता है, तो जातक के जीवन में संघर्ष, चुनौतियाँ और आत्मशक्ति दोनों को बढ़ाता है। यह स्थिति व्यक्ति को मजबूत बनाती है, परंतु कुछ क्षेत्रों में कठोर अनुभव भी दे सकती है। कार्यस्थल और नौकरी छठे भाव में सूर्य वाला व्यक्ति मेहनती, अनुशासित और जिम्मेदार स्वभाव का होता है।नौकरी या सर्विस सेक्टर में इसे सफलता जरूर मिलती है क्योंकि सूर्य यहाँ संघर्षों को जीतने की शक्ति देता है।ऐसे जातकसरकारी नौकरीप्रशासनिक पदपुलिस, सेना, सुरक्षा सेवाएँचिकित्साकानूनन्यायालयया किसी भी…
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जन्मकुंडली का पाँचवाँ भाव बुद्धि, संतान, रचनात्मकता, प्रेम संबंध, शिक्षा, भाग्य, प्राचीन ज्ञान और पूर्व जन्म के कर्मों का प्रतिनिधि होता है। इस भाव में सूर्य का बैठना व्यक्ति के जीवन में तेजस्विता, बुद्धिमत्ता और विशिष्टता लेकर आता है। सूर्य यहाँ अपने श्रेष्ठ रूप में माना जाता है और जीवन के कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देता है, हालाँकि कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद रहती हैं। बुद्धि, ज्ञान और रचनात्मकता पाँचवें भाव में सूर्य वाले व्यक्ति तेज दिमाग, विश्लेषण क्षमता और नेतृत्व गुण के धनी होते हैं।इनकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और शिक्षा के क्षेत्र में यह लोग…
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जन्मकुंडली का चौथा भाव सुख, माता, घर-परिवार, संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति, जमीन-जायदाद और जीवन की नींव का प्रतिनिधित्व करता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तो व्यक्ति के पारिवारिक जीवन, मानसिक स्थिरता और संपत्ति से जुड़े मामलों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। चौथा भाव चंद्रमा का क्षेत्र माना गया है और सूर्य अग्नि तत्व का ग्रह है, इसलिए इन दोनों की ऊर्जा मिलकर जीवन में मिश्रित परिणाम देती है। घरेलू जीवन और माता से संबंध चौथे भाव में सूर्य की स्थिति व्यक्ति को घर में सम्मान और अधिकार देती है, लेकिन कभी-कभी माता से संबंधों में…
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जन्मकुंडली में तीसरा भाव पराक्रम, साहस, आत्मविश्वास, भाई–बहन, संचार कौशल, मेहनत, यात्रा और कौशलों का प्रतिनिधि माना जाता है। सूर्य जब इस भाव में स्थित होता है, तो व्यक्ति के स्वभाव, कार्यशैली और जीवन की दिशा पर गहरा प्रभाव डालता है। तीसरा भाव साहस और प्रयास का घर है, इसलिए यहाँ सूर्य की उपस्थिति व्यक्ति को ऊर्जावान, महत्वाकांक्षी और कर्मप्रधान बनाती है। व्यक्तित्व और साहस तीसरे भाव में सूर्य वाले व्यक्ति बेहद साहसी, आत्मविश्वासी और जोखिम लेने वाले होते हैं। इनके अंदर अपनी पहचान बनाने और अलग दिखने की तीव्र इच्छा रहती है।ऐसे जातक अपने प्रयासों से आगे बढ़ना पसंद…
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जन्मकुंडली का दूसरा भाव धन, वाणी, परिवार, मूल्य, संचित संपत्ति और प्रारंभिक शिक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। जब सूर्य इस भाव में स्थित होता है, तो यह इन सभी क्षेत्रों पर अपनी तेजस्वी और प्रभावशाली छाप छोड़ता है। सूर्य आत्मविश्वास, अधिकार, सम्मान और अग्नि तत्व का ग्रह है, इसलिए इसका प्रभाव दूसरे भाव को काफी मजबूत और कभी-कभी चुनौतीपूर्ण भी बनाता है। व्यक्तित्व और वाणी का प्रभाव दूसरे भाव का सूर्य व्यक्ति की वाणी में दम, अधिकार और प्रभाव पैदा करता है। ऐसे लोग बोलते कम हैं लेकिन प्रभावी बोलते हैं। उनकी आवाज़ में शक्ति और स्पष्टता देखी जाती है।कभी-कभी…
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वैदिक ज्योतिष में पहला भाव जन्मकुंडली का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसे लग्न या आत्मभाव कहा जाता है और यह आपके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, स्वभाव, शारीरिक बनावट और जीवन की दिशा को दर्शाता है। जब सूर्य इस स्थान पर स्थित हो, तो जातक का सम्पूर्ण जीवन सूर्य की तेजस्विता, ऊर्जा और अहं के प्रभाव से रंग जाता है। व्यक्तित्व और स्वभाव पहले भाव में सूर्य होने से व्यक्ति स्वाभाविक रूप से तेजस्वी, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली होता है। उसकी उपस्थिति में एक अलग प्रकार का आकर्षण दिखाई देता है। ऐसे जातक अपनी बात बेझिझक रखते हैं और नेतृत्व की भावना…
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दिसंबर 2025 का महीना मीन राशि के जातकों के लिए आत्मविकास, योजनाओं की पूर्ति और मानसिक शांति का समय रहेगा। इस महीने आप अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं जो आने वाले समय में लाभदायक साबित होंगे। ग्रहों की स्थिति आपके पक्ष में रहेगी और भाग्य का सहयोग भी प्राप्त होगा। करियर और व्यवसायकरियर के क्षेत्र में दिसंबर आपके लिए नई दिशा लेकर आएगा। नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, परंतु आप अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और किसी बड़े प्रोजेक्ट का नेतृत्व करने का अवसर मिल सकता…