• चंद्रमा

    चंद्रमा प्रथम भाव में

    वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, संवेदनशीलता, माता और मानसिक स्थिति का प्रतिनिधि ग्रह है। प्रथम भाव को लग्न भाव कहा जाता है और यह व्यक्ति के शरीर, व्यक्तित्व, स्वभाव और जीवन के प्रति उसके दृष्टिकोण को दर्शाता है। जब चंद्रमा प्रथम भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति का मन और व्यक्तित्व एक दूसरे से पूरी तरह जुड़ जाते हैं। ऐसा व्यक्ति जो सोचता है वही उसके चेहरे, व्यवहार और प्रतिक्रिया में साफ दिखाई देता है। इस स्थिति में व्यक्ति स्वभाव से भावुक, कोमल और संवेदनशील होता है। वह दूसरों की भावनाओं को जल्दी समझ लेता है और उनके…